सोशल मीडिया की मुहिम लाई रंग, 22 छात्रों को आईआईटी ने किया सस्पेंड

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कानपुर. आईआईटी कैंपस में दो महिने पहले जुनियर छात्रों के साथ सीनियरों ने रैंकिंग की थी। पीड़ितों ने इसकी शिकायत आईआईटी प्रशासन से की, लेकिन उन पर जब कार्रवाई नहीं हुई तो जुनियरों ने सोशल मीडिया का सहारा लिया। इसके बाद मामला बढ़ता देख आईआईटी प्रशासन ने देररात एक एतिहासिक फैसला लेते हुए 16 छात्रों को तीन तो छह को एक साल के लिए सस्पेंड कर दिया।

डिप्टी डॉयरेक्टर मणींद्र अग्रवाल ने बताया कि पांच सदस्यीय जांच टीम ने पूरे प्रकरण को जाना और अपनी रिपोर्ट डीन को सौंपी, जिसमें जूनियरों के लगाए आरोप सही पाए गए। हमने आरोपी छात्रों को अवगत करा दिया है और इस फैसले से सस्पेंड छात्रों को अवगत भी करा दिया।

पांच सदस्यीय टीम ने आरोप पाए सही

दो महीने पहले आईआईटी कैंपस में सीनियरों ने जुनियरों छात्रों के साथ रैंकिग की थी।आरोपियों ने उन्हें मुर्गा बनाने के साथ महिला लिवाज में नचाया। जुनियरों से जब इसका विरोध किया तो उन्हें पीटा गया। शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी दी गई। बावजूद जुनियर छात्रों ने पूरे प्रकरण को आईआईटी प्रशासन के समक्ष रखा, लेकिन दाग लगने के डर के चलते मामला छिपाने की कोशिश की गई। इससे गुस्साए जुनियर छात्रों ने सोशल मीडिया में पूरी घटना को शेयर कर दिया। आईआईटी प्रशासन इसी के बाद हरकत में आया और पांच सदस्यीय जांच टीम बना दी। देररात टीम ने अपनी रिपोर्ट में सीनियरों को दोषी पाया। इंस्टिट्यूट के डिप्टी डॉयरेक्टर मणींद्र अग्रवाल के मुताबिक,16 छात्र 3 साल और बाकी 6 छात्र एक साल के लिए निलंबित हुए हैं। सस्पेंड छात्र अपनी सजा पूरी करने के बाद ही इस संस्थान में पढ़ई कर सकते है।

सीनियरों को भी दिया गया मौका

अगस्त में सेकंड ईयर के छात्रों ने हॉस्टल में फ्रेशर्स के कपड़े उतरवा उन्हें आपस में अश्लील हरकतें करने को मजबूर किया था। मामला जानकारी के बाद जांच के लिए एक कमेटी बनाई गई थी। कमेटी ने 22 सीनियर्स को रैगिंग का दोषी माना था। दशहरे के पहले सीनेट ने सभी दोषी छात्रों को निलंबित कर दिया था। रविवार और सोमवार को उन्हें अपना पक्ष रखने का एक मौका दिया गया। सुनवाई पूरी होने के बाद सोमवार को सर्वसम्मति से रैगिंग के मुख्य आरोपी 16 छात्रों को तीन साल के लिए सस्पेंड कर दिया गया। बचे हुए दोषी 6 छात्र एक साल तक निलंबित रहेंगे।

प्रोफेसर ने पीड़ित छात्रों के दिया साथ

रैगिंग के बाद संस्थान के प्रफेसर धीरज संघी ने एक ब्लॉग पोस्ट लिखी थी। इसमें पूरे मामले का सिलसिलेवार विवरण दिया गया था। इसके बाद संस्थान प्रशासन इस मामले को दबा नहीं सका और कड़ी कार्रवाई के लिए उसे मबजूर होना पड़ा। एक पीड़ित छात्र ने बताया कि दो महीने हमारे साथ बहुत बुरा बर्ताव किया गया।

शिकायत वापस लेने के लिए कुछ प्रोफेसर भी दबाव बनाने रहे, लेकिन हम नहीं माने। सीनियरों ने हमें परिसर से बाहर जाने पर रोक के साथ ही मीडिया से बात नहीं करने पर रोक लगा दी। इसी के बाद हम सभी ने सोशल मीडिया का सहारा लिया और हमें आज इंसाफ मिला। ये कार्रवाई यहां एजुकेशन लेने आने वाले छात्रों के लिए मील का पत्थर साबित होगी।

 

आईआईटी रैगिंग 16 छात्र 3 साल के लिए सस्पेंड

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