लगा कूड़े का अंबार, 3 दिन रात में भी उठेगा

d112253550[1]दिवाली पर घर और दुकानों की सफाई के चलते शहर में चार दिनों में दस हजार मीट्रिक टन कूड़ा निकला है। कूड़े को भौंती कूड़ा प्लांट तक पहुंचाने में नगर निगम को अतिरिक्त गाड़ियां लगानी पड़ीं। परेवा के दिन शुक्रवार को छुट्टी के चलते कूड़ा घरों का कूड़ा सड़कों पर आ गया है। हालांकि शनिवार से कूड़ा उठान शुरू हो गया है पर शहर से कूड़ा उठान में नगर निगम को तीन दिन और लग जाएंगे। शहर में रोज 11 से 12 सौ मीट्रिक टन कूड़ा सामान्य दिनों में में डम्प होता है। यह कूड़ा तो रोज की तरह निकला पर चार दिनों में दिवाली पर शहर में पांच हजार मीट्रिक टन अतिरिक्त कूड़ा और निकला जबकि पिछले साल दिवाली पर तीन हजार ही अतिरिक्त कूड़ा ही कूड़ा घरों पर डम्प हुआ था। नगर निगम के नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.पंकज श्रीवास्तव ने बतया कि इस बार कूड़े ने पिछले सालों का रिकार्ड तोड़ दिया है। अभी कूड़ा घरों से कूड़ा साफ करने में तीन दिन लग जाएंगे।d112257938

मूर्तियां बना रहीं मिट्टी और पानी को जहरीला

d110703946विभिन्न मूर्तियां मिट्टी और पानी को खराब कर रही हैं। मूर्तियों को सुंदर व सजाने के लिए लगे केमिकल मिट्टी और पानी में मिलकर उसे जहरीला बना रहे हैं। साथ ही मिट्टी की बजाए मूर्तियों पर पीओपी का कब्जा हो गया है जो अधिक हानिकारक है। यह खुलासा हुआ है एचबीटीयू के पेंट टेक्नोलॉजी विभाग की रिसर्च में। पिछले कुछ वर्षो से बाजार में आ रही मूर्तियों पर मिट्टी की बजाए पीओपी (प्लास्टर ऑफ पेरिस) ने कब्जा कर लिया है। वर्तमान में करीब 10 फीसदी बाजार ही मिट्टी की मूर्ति का बचा है।

पीओपी की मूर्तियों को अधिक सुंदर दिखाने के लिए रंग में पिगमेंट/डाई का प्रयोग करते हैं। इसमें कॉपर, लेड, मैग्नीशियम, आर्सेनिक, क्रोम्स, मरकरी आदि के कम्पाउंड का प्रयोग किया जाता है। मूर्तियों की पूजा के बाद लोग उसे मिट्टी में या पानी में डाल देते हैं। इससे मूर्ति में लगे केमिकल पानी और मिट्टी में मिल जाते हैं जो किसी न किसी वाहक के जरिये मानव शरीर या पशुओं में पहुंचते हैं। इससे एनीमिया, किडनी डैमेज, सांस लेने में दिक्कत, नर्वस सिस्टम को हानि समेत कई खतरनाक बीमारी होने का डर रहता है। मूर्तियों में लगे रंगों में फंगस न लगे, इसके लिए बिट केमिकल का प्रयोग किया जाता है। जो पानी या मिट्टी में मिलकर मानव शरीर को नुकसान पहुंचाता है। पीओपी वैसे भी वातावरण के लिए हानिकारक है।

वाटर बेस्ड पेंट खतरनाक

वर्तमान में वाटर बेस्ड पेंट का अधिक प्रयोग हो रहा है। यह पेंट घर की दीवारों पर लाभदायक है। अभी तक साल्वेंट पेंट का अधिक प्रयोग होता था। जो बच्चों के लिए काफी नुकसानदायक होता था। अब वाटर बेस्ड पेंट का ही प्रयोग मूर्तियां बनाने में किया जा रहा है। मगर इसमें यह खतरनाक साबित हो रहा है। व्यक्ति मूर्तियां कुछ समय रखने के बाद उसे मिट्टी या पानी में डाल देते हैं। इससे पेंट में पड़े केमिकल धीरे-धीरे मिट्टी और पानी में मिलकर उसे जहरीला बना देता है। पहले साल्वेंट पेंट का प्रयोग होता था। जो इसकी अपेक्षा कम खतरनाक था। आस्था पर हो खरीदारीप्रो. अरुण मैथानी ने कहा कि गणोश-लक्ष्मी की पूजा होती है और मूर्तियां खरीदना परम्परा में है इसलिए खरीदना जरूरी है। लोगों को ग्लैमर के बजाए आस्था पर खरीदारी करनी चाहिए। मतलब मिट्टी की मूर्तियां ही खरीदें, ये सुंदर कम होंगी मगर उनके व वातावरण के लाभप्रद होंगी।

 

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